गेहूं में लोहे की कमी के लक्षण जो गेहूं की फसल में उत्पादन कम होने के लिए गंभीर समस्या हो सकती है। गेहूं में लोहे की कमी ज्यादातर उन खेतों में देखी जाती है। जहां बारिश से भूमिगत जलस्तर ऊंचा हो।
सेमग्रस्त एरिया में जहां जल भराव होता हो वहां भी गेहूं के खेत में लोहे की कमी देखी जाती है। और क्षारिय व चुना युक्त मिट्टी में लोहे की कमी देखी जाती है। जिससे गेहूं का उत्पादन मैं विपरीत प्रभाव पड़ता है। लोहे की कमी से 25% तक उत्पादन कम हो जाता है।

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गेहूं में लोहे की कमी के लक्षण
गेहूं में लोहे की कमी के लक्षण दिखाई देते हैं जिससे आप अपने गेहूं के खेत में पता लगा सकते हैं। की गेहूं में लोहे की कमी है या नहीं तो जानते हैं।
- गेहूं की नई पत्तियां पर गेहूं में लोहे की कमी के लक्षण दिखाई देते हैं जिसे नई व ऊपरी पत्तियां पीली पड़ जाती है।
- गेहूं की पत्तियों का सफेद होना गेहूं में लोहे की कमी से पुरी पत्तियां सफेद व पीली हो जाती है। जिससे पौधा कमजोर होने से पत्तियां सूखकर गिरने लगती है।
- गेहूं में लोहे की कमी के लक्षण उन क्षेत्रों में ज्यादा दिखाई देते हैं। जहां भूमिगत वाटर लेवल ऊंचा हो जहां पानी का जमाव अधिक होता है। वहां गेहूं के पत्तियों के ऊपरी सिरे सफेद हो जाते हैं।
- गेहूं में लोहे की कमी के लक्षण कई बार गेहूं की जड़े कमजोर रह जाती है। जिससे पौधे की जड़ विकास नहीं कर पाती
- गेहूं के पौधों का कमजोर विकास जिससे गेहूं के पौधों की ऊंचाई कम रहने से (कलले) टिलरो की संख्या कम होना
गेहूं में लोहे की कमी के कारण
- गेहूं में लोहे की कमी के कारण मिट्टी उच्च PH मान यानी क्षारिय भूमि का होना
- मिट्टी में कैल्शियम कार्बोनेट का अधिक होना
- गेहूं में लोहे की कमी के प्रमुख कारण में से एक गेहूं के खेत में अधिक समय तक पानी भरा रहना व भारी सिंचाई
गेहूं में लोहे की कमी के कारण होने वाले नुकसान
- कमी के कारण गुणवत्ता धटने से बाजार मूल्य काम हो जाता है।
- गेहूं में लोहे की कमी से मिट्टी की सेहत को समय रहते नहीं सुधारा जाता है तो मिट्टी की उर्वराशक्ति खराब हो जाती है।गेहूं में लोहे की कमी के कारण होने वाले नुकसान से गेहूं के पौधों का विकास बाधित होता है। और गेहूं के दोनों का आकार व गुणवत्ता प्रभावित होती है।
- गेहूं में लोहे की
गेहूं में लोहे की कमी के उपचार
गेहूं में लोहे की कमी के लक्षण के उपचार के लिए फोलियर सप्रे का उपयोग कर सकते हैं। लोहे की कमी के उपचार के लिए
गेहूँ की फसल पर 0.5% फैरस सल्फेट (हरा कसिस) 1 किलो 100 लीटर पानी में मिलाकर 8-10 दिन के अन्तर पर लगातार 2-3 सफरे का छिड़काव करें।
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