सरसों की फसल में मरगोजा से 45% तक पैदावार कम हो जाती है।
सरसों की खेती करने वाले अधिकांश किसान इस बात को जानते हैं, कि मरगोजा सरसों की सबसे खतरनाक समस्या बन चुका है। यह कोई सामान्य रोग नहीं, बल्कि एक परजीवी खरपतवार है इसे कई नामों से जाना जाता है जैसे भांपोड,रूखडी भी कहते हैं। जो सरसों की जड़ों के साथ जुड़कर सीधे पोषक तत्व ग्रहण करता है। अगर समय रहते नियंत्रण नहीं किया जाए, तो यह फसल के उत्पादन को 30-40% तक कम कर सकता है।
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कई बार किसान अक्सर इसे सामान्य खरपतवार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन जब तक फूल आने का समय होता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। इस पोस्ट में हम आपको सरसों में मरगोजा का इलाज क्या है मरगोजा के लक्षण,कारण, नियंत्रण के इलाज बताएंगे, ताकि आप अपनी फसल को आसानी से बचा सकें।
मरगोजा सरसों को किस तरह नुकसान पहुंचाता है?
मरगोजा एक परजीवी पौधा है। यह सरसों की जड़ों पर निर्भर रहता है। यह खरपतवार सरसों की जड़ में चिपककर उससे पानी व पोषक तत्व चूस लेता है।
इससे फसल में होने वाला नुकसान की मात्रा
हल्का नुकसान 10 से 20% उपज कम कर देता है। मध्यम नुकसान से 30 से 45% नुकसान होता है व भारी नुकसान में 60 से 100% फसल बर्बाद (कई जगहों पर पूरी फसल नष्ट हो जाती है)
यह समस्या खासकर हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के क्षेत्रो में जहां शूसक एरिया कम पानी वाला क्षेत्र (रेगिस्तान) में बहुत ज्यादा देखी जाती है।
मरगोजा की पहचान सरसों के खेत में कैसे करें?
मरगोजा की पहचान बहुत आसान होती है अगर आप सही समय पर खेत में देख लेते हैं।
1. सरसों के पौधे अचानक मुरझाने लगते हैं, जैसे पानी की कमी हो।
2. सरसों के पौधों की वृद्धि रुक जाती है और पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं।
3. जड़ों के पास छोटे-छोटे पीले-भूरे रंग के तने 4-15 इंच लंबे निकलते हैं, जिन पर बैंगनी या सफेद फूल लगते हैं।
4. एक मरगोजा पौधा 1-5 लाख तक बीज बना सकता है, जो 10-15 साल तक मिट्टी में जीवित रहते हैं।
5. प्रभावित पौधों की फलियां छोटी रह जाती हैं और दाने कम बनते हैं।
फूल आने से पहले (40-60 दिन बाद) खेत में जाकर जड़ों के पास देखें। शुरुआती स्टेज में यह छोटा सा तना दिखाई देता है।
मरगोजा क्यों फैलता है मुख्य कारण
मरगोजा का सबसे बड़ा मुख्य कारण। मरगोजा के बीज सरसों के बीज के साथ मिल जाते हैं। और हार्वेस्टिंग के समय जमीन में बिखर जाते हैं। जिससे मिट्टी में पुराने बीज 10 से 15 साल तक जीवित रहते हैं।
सरसों की फसल दो-तीन साल लगातार लगाने से मरगोजा का प्रकोप बढ़ता है।
सरसों में मरगोजा का प्रभावी इलाज व उपाय
सरसों में मरगोजा का इलाज क्या है जैविक और रासायनिक तरीकों से आसानी से कर सकते हैं।
- सरसों का प्रमाणित और साफ बीज का प्रयोग करें
हमेशा प्रमाणित सरसों का बीज लें जिसमें मरगोजा का बीज न हो। बाजार से सस्ता बीज खरीदने से बचें।
- बीज ट्रीटमेंट जरूर करें
बुवाई से पहले सरसों के बीज को नमक के घोल (20% नमक पानी) में डालें। जिससे मरगोजा के बीज ऊपर तैरने लगता हैं उन्हें हटा दें। फिर साफ पानी से सरसों के बीज को धोकर सुखा कर बिजाई करें
- फसल चक्र अपनाएं
2-3 साल तक सरसों की जगह गेहूं, जौ, चना की फसलें लगाएं। यह सबसे प्रभावी तरीका है।
- पलाऊ से गहरी जुताई और खेत की सफाई
फसल कि कटाई के बाद गर्मियों में खेत की गहरी जुताई करें व प्रभावित पौधों को जड़ सहित उखाड़कर जला दें या गड्ढे में दबा दें
- जैविक तरीके अपनाएं
ट्राइकोडर्मा या स्यूडोमोनास आधारित बायो-फंगीसाइड का इस्तेमाल करें। ये मरगोजा के बीजों को निष्क्रिय करते हैं।
- खेत में मरगोजा दिखे तो हाथ से उखाड़ दे
शुरुआती स्टेज में (फूल आने से पहले) सभी दिखने वाले मरगोजा को जड़ से उखाड़ दे
- रासायनिक उपाय (Glyphosate का उपयोग)**
कुछ किसान ग्लाइफोसेट का स्प्रे करते हैं, लेकिन यह सरसों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। केवल विशेषज्ञ सलाह पर और सावधानी से करें। यह एक प्रभावी खरपतवारनाशी है, इसकी मात्रा 25 ml प्रति एकड़ सरसों में सिंचाई के एक-दो दिन बाद नमी होने पर स्प्रे पंप से छिड़काव करें।
क्या मरगोजा से पूरी तरह छुटकारा संभव है?
एक साल में एक उपाय से काम नहीं चलेगा। 3-4 साल लगातार फसल चक्र अपनाएं और साफ बीज और खेत में गहरी जुताई से मरगोजा का प्रकोप लगभग खत्म हो जाता है।
अगर आप सरसों की खेती करते हैं और मरगोजा की समस्या से जूझ रहे हैं, तो कमेंट में अपना अनुभव शेयर करें। हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपको अच्छी लगी हो तो पोस्ट किसानों के साथ फेसबुक, व्हाट्सएप पर शेयर जरूर करें।









